Sunday, October 4, 2020

खुद को ही भुला बैठा मैं

तुम को देखा तो खुद को ही भुला बैठा मैं
दो पल का वो सफर ज़िन्दगी का सफर बना बैठा मैं
चाहते और ख्वाहिशें तो ना थी कुछ भी तकदीर से
पर न जाने तुझे पाकर तकदीर अपनी बना बैठा मैं

कुछ कसमें और वादे भी किये थे हमने
सुख और दुःख में साथ निभाने के
पर जब बात आई मुश्किलो में साथ चलने की
तो हर बार पाया अपने से आगे तुझको

जानता हूँ ज़िंदगी में एक ऐसा वक़्त भी आएगा
कोई न आएगा जब साथ निभाने को
आँख मूँद कर चलना बेपरवाही से
जो में होऊंगा हर पल तेरा साथ निभाने को 

भटक के ही सही

भटक के ही सही,
रास्ता तो मिला,
मंजिले उन्हे क्या मिले,
जो चले ही नही |

गिर के संभलने का नाम ही तो ज़िंदगी है,
संभलना क्या जाने वो,
जो गिरे ही नही|

बस इतनी सी है ख्वाइश मेरी

बस इतनी सी है ख्वाइश मेरी !
साथ तेरा निभाना है !!
गर बिछड़ भी गया राह में तो !
तुझे मंजिल तक पहुँचाना है !!


साथ रहा गर हम दोनों का !
हर सुख दुःख साथ निभायेंगे !!
गर बिछड़े भी तो अपना !
नाम तेरे सब कर जायेंगे !!


बात ना जाने कल की कोई !
करो ये वादा आज ही हमसे !!
सामने कुछ भी मुश्किल आये !
जुदा ना होगे कभी तुम हमसे !!


ख्वाब जो देखा मिलके हमने !
पूरा हमे मिल करना है !!
गर बिछड़ भी गया तुमसे तो !
वो तुमको पूरा करना है !!

कोशिशें

कोशिशें तमाम कर ली हमने !
खुद को खुश रखने की !!
पर वह वजह न ढूंढ पाए !
तुम्हे भूल जाने की !!


भूल जाऊं तुमको !
न था ये मेरा फैसला !!
पर तेरी जाने की जिद्द को !
ठुकरा भी न सका में !!

 

कौन हो तुम !
इसका भी फैसला हो जाये !!
गर हमसफ़र हो तो !!
सफर से ही जुदा हो जाये !!


दुनिया न जान पायेगी !
उन लम्हो के नामो निशां को !!
दूर दफ़न कर आऊंगा !
मुहब्बत की अपनी इस दास्ताँ को !!

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