तुम को देखा तो खुद को ही भुला बैठा मैं
दो पल का वो सफर ज़िन्दगी का सफर बना बैठा मैं
चाहते और ख्वाहिशें तो ना थी कुछ भी तकदीर से
पर न जाने तुझे पाकर तकदीर अपनी बना बैठा मैं
कुछ कसमें और वादे भी किये थे हमने
सुख और दुःख में साथ निभाने के
पर जब बात आई मुश्किलो में साथ चलने की
तो हर बार पाया अपने से आगे तुझको
जानता हूँ ज़िंदगी में एक ऐसा वक़्त भी आएगा
कोई न आएगा जब साथ निभाने को
आँख मूँद कर चलना बेपरवाही से
जो में होऊंगा हर पल तेरा साथ निभाने को
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