भटक के ही सही,
रास्ता तो मिला,
मंजिले उन्हे क्या मिले,
जो चले ही नही |
गिर के संभलने का नाम ही तो ज़िंदगी है,
संभलना क्या जाने वो,
जो गिरे ही नही|
इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी कम है तू किसी से रश्क के लिए ना दे रब मुझे दौलत या शोहरत सुकूने जिंदगी चाहिए मुझे अपने लिए क्या मांगू किसी की...
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