चिरागो की लौ कभी !
अंधेरो से डरा नहीं करती !!
सच्चाई नज़रो में हो गर तो !
उजालो की जरूरत हुआ नहीं करती !!
यूँ तो एक चिंगारी भी !
काफी है नाबूद की लिए !!
आब नज़रो में हो गर तो !
नज़रे झुकाने से हार नहीं होती !!
कोशिश कितनी कर ले इंसां !
नज़र बचाने की भी तो !!
खुदा की नज़रो से कभी !
गुस्ताखियां कोई बचा नहीं करती !!
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