Tuesday, October 6, 2020

फिक्रमंद खुद के रहो यारो

फिक्रमंद खुद के रहो यारो।
ये दुनिया किसी की न हुई।।
खुद से खुद का इश्क़ न हुआ गर।
तो समझो ज़िन्दगी ये बेकार गयी।।

गर मिटा भी दो खुद को कभी।
किसी को परवाह नही।।
अपनी भी कद्र कभी।
जमाने को हुई नही।।

उम्र तमाम गुजरी इस कदर।
न रूबरू हो पाए खुद से कभी।।
इल्म हुआ जब इस बात का।
उम्र तभी तमाम हुई।। 

No comments:

Post a Comment

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी  कम है तू किसी से रश्क के लिए  ना दे रब मुझे दौलत या शोहरत सुकूने जिंदगी चाहिए मुझे अपने लिए  क्या मांगू किसी की...