रुकी रुकी हुयी सी ज़िन्दगी !
रफ़्तार पकड़ चली है !!
दो वक़्त की रोटी ही नहीं !
कवायतें अभी और भी हैं !!
एक पल का सकूं तो न मिला !
शिकायते अभी और भी हैं !!
कर न सका गर इत्तिका तो !
उंगली सब उठाते हैं !!
न कर पाने की वजह भी वह !
पूछ नहीं पाते हैं !!
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी !
ऐसे ना नाराजी कोई दिखाइए !!
पर सुनने को मजबूरियों भी तो !
एक अदद दिल चाहिए !!
जब तलक रही जरूरत !
ज़िक्र हमारा होता रहा !!
अब हमारे आने पे !
पूछते हैं आना कैसे हुआ !!
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