Sunday, October 4, 2020

इंतज़ार फरिश्तो का

ना कर इंतज़ार फरिश्तो का ऐ दोस्त !
भरोसा खुद पे करके तो देख !!
कौन कहता है न लग सकती आग पानी में !
जिगर में वह आग पैदा करके तो देख !
वजूद न मिटा सका उसका कोई !
बंदगी की है खुदा की जिसने !!
हर मर्ज की दवा रखता हूँ ऐ ज़िन्दगी !
एक बार कोई मर्ज देके तो देख !!
खुदा को इंसान बनते कई बार देखा है !
एक बार तू इंसान तो बनके देख !!
कौन कहता है की तू सिकंदर नहीं हो सकता !
एक बार वह जूनून ला के तो देख !!
ना जी हर पल खुदगर्जी में ऐ दोस्त !
दुसरो को ख़ुशी बाट तो देख !!
कौन कहता न खुदा आ सकेगा रूबरू !
एक बार तबियत से बुला के तो देख !! 

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