Sunday, October 4, 2020

दे न सका रोशनाई जरा सी

दे न सका रोशनाई जरा सी !
नवाज़िश की जिसे परवाह नहीं !!
इंसान नहीं वह पत्थर है !
दिल में जिसके प्यार नहीं !!
इल्म नहीं उन बन्दों को !
जो दौलत से इत्तिहाद करे !!
हज़् न कबूल खुदा करे !
जो खुदा को कभी न याद करे !!
इन् फरेब पसंद इंसानो से !
ईमान की कोई उम्मीद नहीं !!
नहीं गवारा इक लफ्ज भी उनका !
नीयत जिनकी साफ़ नहीं !! 

इंतज़ार फरिश्तो का

ना कर इंतज़ार फरिश्तो का ऐ दोस्त !
भरोसा खुद पे करके तो देख !!
कौन कहता है न लग सकती आग पानी में !
जिगर में वह आग पैदा करके तो देख !
वजूद न मिटा सका उसका कोई !
बंदगी की है खुदा की जिसने !!
हर मर्ज की दवा रखता हूँ ऐ ज़िन्दगी !
एक बार कोई मर्ज देके तो देख !!
खुदा को इंसान बनते कई बार देखा है !
एक बार तू इंसान तो बनके देख !!
कौन कहता है की तू सिकंदर नहीं हो सकता !
एक बार वह जूनून ला के तो देख !!
ना जी हर पल खुदगर्जी में ऐ दोस्त !
दुसरो को ख़ुशी बाट तो देख !!
कौन कहता न खुदा आ सकेगा रूबरू !
एक बार तबियत से बुला के तो देख !! 

रुकी रुकी हुयी सी ज़िन्दगी

रुकी रुकी हुयी सी ज़िन्दगी !
रफ़्तार पकड़ चली है !!
दो वक़्त की रोटी ही नहीं !
कवायतें अभी और भी हैं !!
एक पल का सकूं तो न मिला !
शिकायते अभी और भी हैं !!

कर न सका गर इत्तिका तो !
उंगली सब उठाते हैं !!
न कर पाने की वजह भी वह !
पूछ नहीं पाते हैं !!

कुछ तो मजबूरियां रही होंगी !
ऐसे ना नाराजी कोई दिखाइए !!
पर सुनने को मजबूरियों भी तो !
एक अदद दिल चाहिए !!

जब तलक रही जरूरत !
ज़िक्र हमारा होता रहा !!
अब हमारे आने पे !
पूछते हैं आना कैसे हुआ !! 

आजमाइश

आजमाइश रिश्तो की न कर ऐ दोस्त
व्यस्त तू भी है व्यस्त में भी
न कर हिसाब मेरी खुशियों का
मस्त तू भी है मस्त में भी

कर रहा है जो तू तमाम कोशिशें
ज़माने को दिखाने की
मन ही मन जानता तो तू भी है
रह जाएँगी वह सब यहीं

न है मेरे पास दौलतों का अम्बार
कमाया है फिर भी मैंने कुछ ख़ास
बस यही काफी है मेरे लिए ऐ दोस्त
हंस तू भी रहा है और में भी

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी  कम है तू किसी से रश्क के लिए  ना दे रब मुझे दौलत या शोहरत सुकूने जिंदगी चाहिए मुझे अपने लिए  क्या मांगू किसी की...