दे न सका रोशनाई जरा सी !
नवाज़िश की जिसे परवाह नहीं !!
इंसान नहीं वह पत्थर है !
दिल में जिसके प्यार नहीं !!
इल्म नहीं उन बन्दों को !
जो दौलत से इत्तिहाद करे !!
हज़् न कबूल खुदा करे !
जो खुदा को कभी न याद करे !!
इन् फरेब पसंद इंसानो से !
ईमान की कोई उम्मीद नहीं !!
नहीं गवारा इक लफ्ज भी उनका !
नीयत जिनकी साफ़ नहीं !!