सच कहता हूँ ए दोस्तों !
मुहब्बत की इन्तहा हो जाये !!
गर अश्क मेरे लिए !
उनकी आँखों में आ जाये !!
खुशनसीब हूँ मैं बहुत !
जो चाहां वह पा गया !!
अश्क जो मेरे लिए !
तेरी आँखों मैं आ गया !!
रूठने पे उनके मैं !
बार बार मनाऊंगा !!
चले गए वह एक बार तो !
कहाँ से वापिस पाउँगा !!
मुहब्बत सिर्फ जिस्म से नहीं !
रूह तलक उत्तर जाये !!
इश्क़ भी ऐसा हो !
जो हद से गुजर जाये !!
Babur hi achchi kabita
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