Sunday, October 4, 2020

सच कहता हूँ ए दोस्तों

सच कहता हूँ ए दोस्तों !
मुहब्बत की इन्तहा हो जाये !!
गर अश्क मेरे लिए !
उनकी आँखों में आ जाये !!


खुशनसीब हूँ मैं बहुत !
जो चाहां वह पा गया !!
अश्क जो मेरे लिए !
तेरी आँखों मैं आ गया !!


रूठने पे उनके मैं !
बार बार मनाऊंगा !!
चले गए वह एक बार तो !
कहाँ से वापिस पाउँगा !!


मुहब्बत सिर्फ जिस्म से नहीं !
रूह तलक उत्तर जाये !!
इश्क़ भी ऐसा हो !
जो हद से गुजर जाये !!

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