Friday, November 6, 2020

इस जहाँ में कोई मैखाना नहीं होता

ना होते इतने करीब
गर होश में जो होते
कमबख्त बेखुदी ने तेरा
दीवाना बना दिया


क्या जाने वो
कीमत इस मैखाने की !
इसी ने तो परायो को
अपना बना दिया

लोग कहते है जगह है बुरी
न जाया करो
कहता हूँ मैं लग जाये
ये आदत ज़माने को


ज़िन्दगी में न पूछ सके
जो हाले दिल
कम से कम मैखाने में
दिल तो मिलाने दो

पैमाना न बना
ज़िन्दगी में तू किसी चीज़ का
अपनों के लिए यहाँ
पैमानों को बदलते देखा है

पर खासियते मैखाना
तो दखिये एक बार
यहाँ परायो को भी अपने
जाम बदलते देखा है

गलत हु मैं , बोल गया बेखुदी में मैखाने में कोई कभी पराया नहीं होता गर होता तो शायद इस जहाँ में कोई मैखाना नहीं होता

Friday, October 30, 2020

जिंदगी इस कदर है खामोश क्यूँ

जिंदगी इस कदर है खामोश क्यूँ
वस्ल नहीं कोई प्यास नहीं
कहने को तो है बहुत कुछ मगर
आज वो फकत अहसास नहीं

नवाज़िश नहीं मयस्सर खुदा
रही क्या इस ज़माने में
हर सहर हूँ ढूंढता मैं
इक मोजिजा तेरे ख़ज़ाने में

रिश्तो के दरमियाँ क्या फसे
कभी तुम हँसो कभी हम हँसे
रुखसत तो ज़माने से होना है सबको
तुम ही तुम जिए तो क्या जिए


वस्ल - मिलाप

नवाज़िश - कृपा, मेहरबानी

मयस्सर - उपलब्ध होना

सहर - प्रातःकाल, सवेरा

मोजिजा - अलौकिक चमत्कार

Tuesday, October 20, 2020

नागवार गुजरती हैं

नागवार गुजरती हैं हमारी तो खिदमते भी

उनकी तो गालियां भी दुवाओ सी लगती हैं

 

हम तो जान भी दे तो परवाह नही

उनकी इक आह पे भी जान निकलती है

 

क्या करे हम मजबूर है अपनी आदत से

नज़रे फिर भी उनकी परायी सी लगती है

 

मुकम्मल होते सपनो के दरमियान

अब तो हर वाह भी शिकायत सी लगती है


Monday, October 19, 2020

राह कठिन है

राह कठिन है।
दृश्य है ओझल।।
अगले पग का।
नही है सम्भल।।
फिर भी चलते जाना है।
समय को हराना है।।

खुशी का हो या पल हो गम का।
हर पल का सम्मान करूँ।।
रुका नही जब पल खुशी का।
दुख का फिर क्यों ध्यान करूँ।।

उठूं गिरूं फिर गिरूं उठूं।
कोशिश हर नाकाम करूं।।
हार से पहले हार भला।
कैसे में स्वीकार करूँ।। 

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी  कम है तू किसी से रश्क के लिए  ना दे रब मुझे दौलत या शोहरत सुकूने जिंदगी चाहिए मुझे अपने लिए  क्या मांगू किसी की...