Tuesday, October 13, 2020

मुश्किल बहुत है पार करना

मुश्किल बहुत है पार करना !
समुन्दर को तैर के !!
आसां बहुत है बात करना !
किनारे पे बैठ के !!

लड़ के जीता हरदम वही !
हार ना जिसने मानी कभी !!
हौसला जो रखते नहीं !
जीता नहीं करते कभी !!

जो करनी है मंजिले हासिल !
खुद पे तू भरोसा तो कर !!
बन जायेंगे रास्ते खुद बा खुद !
चलने का आगाज़ तो कर !!

आएँगी तो मुश्किलें बहुत !
मंजिलो की राह में !!
करेगी दुनिया कोशिश बहुत !!
करने की गुमराह तुझे !!

हासिल होगी मंजिल तुझे !
गर भूल सका दुनिया को तू !!
होगा ये मुमकिन तभी !
जो देखेगा सिर्फ मंजिल को तू !!

क्या उम्मीद करूँ

क्या उम्मीद करूँ !
मैं भी इस ज़माने से !!
ऐतराज़ है जिसे !
मेरे जरा से मुस्कुराने से !!

ऐ काश की आ जाये समझ !
ज़माने को साथ चलने की !!
यूँ ही नहीं पड़ती ज़रुरत !
इंसां को हाथ पकड़ने की !!

यूँ ही नहीं बदलते !
चेहरे यहाँ किसी के !!
चंद लोग ही है बदलते !
मायने यहाँ ज़िन्दगी के !!

खाली हाथ भेजा है उसने

खाली हाथ भेजा है उसने !
और खाली हाथ बुलायेगा !!
फिर गुरूर किस बात का !
जब तू मिट्टी में मिल जायेगा !!

दौलत शोहरत बंगला गाडी !
सब कुछ यही रह जायेगा !!
पुण्य कमाया जितना तूने !!
उतना ऊपर जायेगा !!

सब मुसाफिर दुनिया में !
सबको एक दिन जाना है !!
क्यों रहे इस दुनिया में तू !
जैसे यही पे रहना है !!

कल की चिंता छोड़ के !
आज में बस जी ले तू !!
क्या पता तू इस दुनिया में !
कल तू हो ना हो !!

Tuesday, October 6, 2020

फिक्रमंद खुद के रहो यारो

फिक्रमंद खुद के रहो यारो।
ये दुनिया किसी की न हुई।।
खुद से खुद का इश्क़ न हुआ गर।
तो समझो ज़िन्दगी ये बेकार गयी।।

गर मिटा भी दो खुद को कभी।
किसी को परवाह नही।।
अपनी भी कद्र कभी।
जमाने को हुई नही।।

उम्र तमाम गुजरी इस कदर।
न रूबरू हो पाए खुद से कभी।।
इल्म हुआ जब इस बात का।
उम्र तभी तमाम हुई।। 

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी

इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी  कम है तू किसी से रश्क के लिए  ना दे रब मुझे दौलत या शोहरत सुकूने जिंदगी चाहिए मुझे अपने लिए  क्या मांगू किसी की...