किश्तों में कट रही ज़िन्दगी।
कागज़ के टुकड़े से ये पल।।
स्याही भी खत्म हो रही।
क्या लिखूं इसपे कल।।
कशमकश में बीत रही ज़िन्दगी।
आज को कल में बदलते हुए।।
इंतज़ार उस दिन का जो होगा मेरा।
ज़िन्दगी को बस में करते हुए।।
काश कि थम जा तू ऐ जिंदगी।
फुरसत से करेंगे दीदार तेरा।।
आज न हो सकूँगा रूबरू तुझसे।
आऊंगा फिर ना करना इंतज़ार मेरा।।
No comments:
Post a Comment