टूट जाये विश्वास अगर तो।
माफ़ी का कोई मोल नही।।
साथ न दुख में दे सके तो।
सुख के साथ का मोल नही।।
धागा टूटे गांठ पड़े।
फिर जुड़ने का मोल नही।।
दुख में सुमिरन ना करे तो।
फिर मिलने का मोल नही।।
टूट रहे जो धन के कारण।
उन रिश्तो का मोल नही।।
दुख में सुख में साथ रहे जो।
बस रिश्ते अनमोल वही।।
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