दस्तूर है जीने का !
तुझको ऐ ज़िन्दगी !!
फकत सांस लेना ही !
ज़िन्दगी तो नहीं !!
चलना भी पड़ता है !
मंज़िल की तरफ !!
फकत इंतज़ार से !
मंज़िले तो मिलती नहीं !!
क्या रास्ते क्या मंजिले !
क्या दस्तूर-ऐ ज़िन्दगी !!
जिए जा रहे हैं यू ही !
गलती तो उनकी भी नहीं !!
इश्क़ है मुझे तुझसे ऐ जिंदगी कम है तू किसी से रश्क के लिए ना दे रब मुझे दौलत या शोहरत सुकूने जिंदगी चाहिए मुझे अपने लिए क्या मांगू किसी की...
Bohot khoob anupam bhaiyya...👍👍
ReplyDeleteThank you
ReplyDeleteKya baat hai...bahut badhiya
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