Thursday, October 15, 2020

दस्तूर है जीने का

दस्तूर है जीने का !
तुझको ऐ ज़िन्दगी !!
फकत सांस लेना ही !
ज़िन्दगी तो नहीं !!

चलना भी पड़ता है !
मंज़िल की तरफ !!
फकत इंतज़ार से !
मंज़िले तो मिलती नहीं !!

क्या रास्ते क्या मंजिले !
क्या दस्तूर-ऐ ज़िन्दगी !!
जिए जा रहे हैं यू ही !
गलती तो उनकी भी नहीं !!

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