Tuesday, October 13, 2020

क्या उम्मीद करूँ

क्या उम्मीद करूँ !
मैं भी इस ज़माने से !!
ऐतराज़ है जिसे !
मेरे जरा से मुस्कुराने से !!

ऐ काश की आ जाये समझ !
ज़माने को साथ चलने की !!
यूँ ही नहीं पड़ती ज़रुरत !
इंसां को हाथ पकड़ने की !!

यूँ ही नहीं बदलते !
चेहरे यहाँ किसी के !!
चंद लोग ही है बदलते !
मायने यहाँ ज़िन्दगी के !!

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